Outcome-based Education (प्रतिफल आधारित शिक्षा)

प्रतिफल आधारित शिक्षा हमें यह बताता है कि हमारी पढ़ाई अथवा प्रशिक्षण का नतीजा क्या है। हमें सीखने से क्या प्राप्त हुआ। मूल रूप से सीखने का मतलब यह नहीं है कि किसी चीज़ को सीखने में आपने कितना वक्त लगाया। बल्कि इसका मतलब यह है कि सीखने के बाद क्या आप वह कर पाए जिसके लिए आपने प्रशिक्षण ली। प्रतिफल आधारित शिक्षा के तरीके की खास बात यही है कि इससे हमें परिणाम और लक्ष्य की प्राप्ति होती है।

प्रतिफल आधारित शिक्षा के प्रमुख भाग यह है –

  • परिणाम को निर्धारित करना जो कि प्रशिक्षण का लक्ष्य होता है। मतलब कि अपने प्रशिक्षण के अंत में आप अपने विद्यार्थी को क्या हासिल कराना चाहते हैं। इसके बाद आप पता करें कि इस समय आपका विद्यार्थी प्रशिक्षण के लक्ष्य तक कहां तक पहुँचा है।
  • फिर पता करें कि विद्यार्थी अभी जहां है और प्रशिक्षण के अंत में जहां पहुंचना चाहता है उसमें कितना अंतर है।
  • इस अंतर का पता करने के बाद आप अपनी प्रशिक्षण को तैयार करें। जिसके बाद आप इस को सही से खत्म कर सकते हैं। जब आप एक बार प्रशिक्षण की रुपरेखा तैयार कर लेंगे। फिर आप आसानी से प्रशिक्षण वितरण कर सकते हैं और फिर आकलन कर सकते हैं कि आपका लक्ष्य पूरा हुआ कि नहीं।
  • यह बेहद आसान और सटीक तरीका है इसे हम प्रतिफल आधारित शिक्षा का EDDA model कहते हैं, जिसमें कि पहले प्रशिक्षण के परिणाम को स्थापित करते है। फिर रुपरेखा तैयार करते है। फिर वितरण करते है। और बाद में पता करें कि आपका लक्ष्य पूरा हो भी रहा है कि नहीं।

अब जब आप प्रतिफल को एक बार स्थापित करेंगे तो आपको दो चीज़ें करनी पड़ेंगी।

  • पहली वंचित परिणाम को परिभाषित करें और फिर उसके बाद प्रशिक्षण विश्लेषण करें।
  • प्रशिक्षण विश्लेषण से हमें यह अंतर पता चल जाता है कि विद्यार्थी आज कहां है और उसे प्रशिक्षण के देने के बाद हमें कहां पहुंचाना है।

इसके बाद ही आपको प्रशिक्षण की रुपरेखा तैयार करना होगा। प्रशिक्षण को इस तरह तैयार करें जिससे आपके विद्यार्थी को ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा हो इसलिए आपको विद्यार्थी के बारे में विस्तार पूर्वक समझना होगा। आपको समझना होगा कि आपका विद्यार्थी क्या सीखना चाहता है और उसके सीखने की क्षमता कितनी है।

Outcome-based learning tells us what is the result of our studies or training. What did we get from learning? Learning basically doesn’t mean the amount of time you put into learning something. Rather it means that after learning, were you able to do what you trained for. The special thing about the method of Outcome-based education is that it gives us results and goals.

The main parts of Outcome-based education are:

  • Determining the outcome that is the goal of the training. This means what you want your student to achieve at the end of your training. You then find out how far your student has reached the training goal at this point in time.
  • Then find out the difference between where the student is now and where they want to be at the end of the training.
  • Once you know this difference, prepare your training. After which you can finish it right. Once you have prepared the training outline. You can then easily distribute the training and then assess whether your goal is met.
  • This is a very simple and accurate way of doing what we call the EDDA model of Outcome-based learning, which first establishes the outcome of the training. Then make the outline. Then distribute. And later find out whether your goal is being achieved or not.

Now when you set the returns once, you have to do two things.

  • First, define the contrived outcome and then do the training analysis after that.
  • Training analysis lets us know the difference between where the student is today and where we have to take him after training.

Only after this, you will have to prepare the outline of the training. Design the training in a way that benefits your student as much as possible, so you need to understand the student in detail. You have to understand what your student wants to learn and what their learning capacity is.

IGNOU BESC-132 NOTES IN HINDI AND ENGLISH

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