MHD-02 solved assignment 2018-19

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FREE IGNOU MHD-02 solved assignment 2018-19 –

 

1 निम्नलिखित प्रत्येक काव्यांश की लगभग 200 शब्दों में सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

क) हे तात, तालसम्पुटक तनिक ले लेना,

बहनों को वन-उपहार मुझे है देना।

“जो आज्ञा”–लक्ष्मण गये तुरन्त कुटी में;

ज्यों घुसे सूर्य-कर-निकर सरोज-पुटी में।

जाकर परन्तु जो वहाँ उन्होंने देखा,

तो दीख पड़ी कोणस्थ उर्मिला-रेखा। 

यह काया है या शेष उसी की छाया,
क्षण भर उनकी कुछ नहीं समझ में आया!
“मेरे उपवन के हरिण, आज वनचारी,
मैं बाँध न लूँगी तुम्हें; तजो भय भारी।”
गिर पड़े दौड़ सौमित्रि प्रिया-पद-तल में;
वह भींग उठी प्रिय-चरण धरे दृग-जल में।

 

ख) हरी बिछली घास।
दोलती कलगी छरहरे बाजरे की।

अगर मैं तुम को ललाती सांझ के नभ की अकेली तारिका
अब नहीं कहता,
या शरद के भोर की नीहार – न्हायी कुंई,
टटकी कली चम्पे की, वगैरह, तो 
नहीं कारण कि मेरा हृदय उथला या कि सूना है
या कि मेरा प्यार मैला है।

बल्कि केवल यही : ये उपमान मैले हो गये हैं।
देवता इन प्रतीकों के कर गये हैं कूच।

ANSWER –

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