IGNOU MHD-01 QUESTION PAPER WITH SOLUTION FOR EXAM PREPARATION

राजै कहा दरस जौ पावौं । परबत काह, गगन कहँ धाावौं॥

जेहि परबत पर दरसन लहना । सिर सौं चढ़ौं, पाँव का कहना॥

मोहूँ भावै ऊँचै ठाऊँ । ऊँचै लेउँ पिरीतम नाऊँ॥

पुरुषहि चाहिय ऊँच हियाऊ । दिन दिन ऊँचे राखै पाऊ॥

सदा ऊँच पै सेइय बारा । ऊँचै सौं कीजिय बेवहारा॥

ऊँचे चढ़ै, ऊँच खंड सूझा । ऊँचै पास ऊँच मति बूझा॥

ऊँचे सँग संगति नित कीजै । ऊँचे काज जीउ पुनि दीजै॥

दिन दिन ऊँच होइ सो, झेहि ऊँचे पर चाउ।

ऊँचे चढ़त जो सखि परै, ऊँच न छाड़िय काउ॥5॥

बिहारी के प्रकृति चित्रण की विशेषताएँ बताइए।

 

साधो, देखो जग बौराना ।
साँची कही तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना ।
हिन्दू कहत,राम हमारा, मुसलमान रहमाना ।
आपस में दौऊ लड़ै मरत हैं, मरम कोई नहिं जाना ।
बहुत मिले मोहि नेमी, धर्मी, प्रात करे असनाना ।
आतम-छाँड़ि पषानै पूजै, तिनका थोथा ज्ञाना ।
आसन मारि डिंभ धरि बैठे, मन में बहुत गुमाना ।
पीपर-पाथर पूजन लागे, तीरथ-बरत भुलाना ।
माला पहिरे, टोपी पहिरे छाप-तिलक अनुमाना ।
साखी सब्दै गावत भूले, आतम खबर न जाना ।

तुलसी के सामाजिक दृष्टिकोण का मूल्यांकन कीजिए।

 तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे।
हित-पोष के तोष सु प्रान पले, बिललात महादुख दोष भरे।
‘घनआनंद’ मीत सुजान बिना, सब ही सुख-साज समाज टरे।
तब हार पहार से लागत हे, अब आनि के बीच पहार परे।।

 

खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि,
वनिक को बनिज न,  चाकर को चाकरी ।
जीविका विहीन लोग, सीद्यमान सोच बस,
कहैं एक एकन सों,  कहाँ जाई, का करी ।।

बेदहूँ पुरान कहीलोकहूँ बिलोकिअत

साँकरे सबै पैरामरावरें कृपा करी

दारिद-दसानन दबाई दुनी , दीनबंधु !

दुरित-दहन देखि तुलसी हहा करी

विद्यापति की काव्य संवेदना में मौजूद भक्ति और श्रृंगार के द्वंद्व का मूल्यांकन कीजिए।

 



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